जानलेवा हुईं दिल्ली की आबो–हवा ! प्रदूषण की वजह से लगा दिल्ली में लॉकडाउन
दिल्ली में प्रदूषण इतना क्यों हो रहा है ?
दिल्ली में प्रदूषण इतना ज्यादा होने के पीछे कई बड़े कारण हैं। सर्दियों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ हवा में फैलकर दिल्ली तक पहुँच जाता है। वाहनों की संख्या बहुत अधिक है, जिनसे निकलने वाला धुआँ वायु गुणवत्ता को खराब करता है। निर्माण कार्य, सड़क की धूल और खुले में कचरा जलाना भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। ठंड के मौसम में हवा की गति कम होती है और तापमान उलटाव (टेम्परेचर इन्वर्ज़न) बनता है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं जा पाते और शहर में ही फँस जाते हैं। इसके अलावा औद्योगिक उत्सर्जन, पेड़ों की कमी और जनसंख्या घनत्व भी दिल्ली के गंभीर प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
दिल्ली में अभी कितनी AQI चल रही हैं ?
दिल्ली में आज एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 246 µg/m³ दर्ज किया गया है, जो Unhealthy श्रेणी में आता है. हवा में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों का स्तर इस प्रकार है: PM2.5 – 246 µg/m³, PM10 – 157 µg/m³, , SO₂ – 3 mb, NO₂ – 18 mb, CO – 15 mb, O₃ – 55 mb.
बता दें कि विभिन प्रदूषकों की अधिक मात्रा होने से हवा सांस लेने लायक नहीं रहती, इसलिए प्रदूषण के स्तर को ध्यान में रखते हुए सुबह-शाम बाहर निकलते समय सावधानी बरतना जरूरी होता है. अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ जाए तो बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए बेहद संवेदनशील हो सकता है.
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार क्या कर रही हैं ?
दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई सख्त कदम उठा रहे हैं। सबसे पहले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के उच्च स्तर लागू किए जाते हैं, जिसमें निर्माण कार्य रोकना, भारी वाहनों पर प्रतिबंध और स्कूलों/कार्यालयों में वर्क-फ्रॉम-होम की सलाह शामिल है। पुराने और उच्च उत्सर्जन वाले वाहन, जो BS-VI मानक पर खरे नहीं उतरते, उन्हें शहर में आने से रोका जा रहा है और Pollution Under Control Certificate (PUCC) बिना उन्हें ईंधन नहीं मिलेगा। सरकार ने एंटी-स्मॉग गन, धूल नियंत्रण, निगरानी और जुर्माने जैसी व्यवस्थाएँ भी सख्ती से लागू की हैं ताकि प्रदूषण के स्रोतों को कम किया जा सके।
प्रदूषण कम करने के लिए क्या–क्या किया जा सकता है ?
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार और आम नागरिक दोनों को मिलकर कई कदम उठाने चाहिए। निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन, कार-पूलिंग, साइकिल और पैदल चलने को बढ़ावा देना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। खुले में कचरा, प्लास्टिक या पराली जलाने से बचना जरूरी है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और सड़कों की नियमित सफाई होनी चाहिए। अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएँ और हरित क्षेत्रों को बचाया जाए। कारखानों में स्वच्छ तकनीक और कड़े नियम लागू हों। ऊर्जा बचत, सौर व पवन ऊर्जा का उपयोग, और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी प्रदूषण कम करने के प्रभावी उपाय हैं।
ये भी पढ़ें :–अवतार :– आग और राख | अनोखी कहानी और धमाकेदार सिनेमैटिक दृश्य !
प्रदूषण से क्या क्या बिमारियां हो सकती हैं ?
प्रदूषण से शरीर पर कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वायु प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, फेफड़ों की कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याएँ होती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। आँखों में जलन, खुजली और आँखों की सूजन भी आम समस्या है। प्रदूषण त्वचा रोग, समय से पहले झुर्रियाँ और बालों की समस्याएँ पैदा कर सकता है। बच्चों में फेफड़ों का विकास प्रभावित होता है और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अत्यधिक प्रदूषण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
नोट :– हम किसी प्रकार की निवेश या खरीद, बिकवाल की सलाह नहीं देते हमारा उद्देश्य सिर्फ सरल भाषा में संक्षेप करना है | हम किसी कंपनी को अच्छा या बुरा नहीं बता सिर्फ सरल शब्दों में विवरण देते है|
