क्या शेयर मार्केट में आ सकता है क्रैश जाने वजह नहीं तो बाद में पछताओगे
क्या शेयर मार्केट अधिक Bullish zone में हैं ?
वर्तमान समय में शेयर मार्केट को पूरी तरह से अधिक Bullish zone में कहना सही नहीं होगा, लेकिन बाजार में तेजी की प्रवृत्ति जरूर दिखाई दे रही है। मजबूत आर्थिक संकेत, कॉरपोरेट मुनाफे में सुधार, सरकारी नीतियों का समर्थन और लंबी अवधि के निवेशकों की सक्रियता बाजार को सहारा दे रही है। हालांकि ऊँचे वैल्यूएशन, वैश्विक अनिश्चितता, ब्याज दरों का दबाव और जियो-पॉलिटिकल जोखिम बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकते हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति को आंशिक रूप से Bullish और आंशिक रूप से Consolidation zone कहा जा सकता है। निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।
शेयर मार्केट में किस वजह से क्रैश आता है ?
शेयर मार्केट में क्रैश कई कारणों से आता है। आर्थिक मंदी, GDP ग्रोथ में गिरावट और बेरोजगारी बढ़ने से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है। ब्याज दरों में तेज़ बढ़ोतरी से कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है। युद्ध, महामारी, राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक संकट भी बाजार में भारी गिरावट लाते हैं। बड़े विदेशी निवेशकों की अचानक बिकवाली, ओवरवैल्यूएशन और बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी क्रैश का कारण बन सकती है। इसके अलावा बड़े कॉरपोरेट घोटाले, बैंकिंग संकट और लिक्विडिटी की कमी से घबराहट फैलती है, जिससे शेयर मार्केट में तेज़ गिरावट देखने को मिलती है।
शेयर मार्केट में क्रैश आए तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
शेयर मार्केट में क्रैश आने पर सबसे पहले घबराहट से बचना चाहिए, क्योंकि डर में लिया गया फैसला नुकसान बढ़ा सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को अपनी रणनीति पर भरोसा रखना चाहिए और बिना वजह अच्छे शेयर नहीं बेचने चाहिए। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान दें और कमजोर शेयरों से दूरी बनाएं। एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर होता है। अपने पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन बनाए रखें ताकि जोखिम कम हो। इमरजेंसी फंड अलग रखें और जरूरत से ज्यादा उधार लेकर निवेश करने से बचें। सबसे जरूरी, क्रैश को सीख और अवसर की तरह समझना चाहिए।
सबसे बड़ी क्रैश शेयर मार्केट में कब आई थी ?
शेयर मार्केट में सबसे बड़ी क्रैश 1929 में आई थी, जिसे ग्रेट डिप्रेशन (Great Depression) कहा जाता है। अक्टूबर 1929 में अमेरिका का डाउ जोंस इंडेक्स कुछ ही दिनों में करीब 25–30% गिर गया, जिससे पूरी दुनिया के शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए। लाखों निवेशकों की पूंजी खत्म हो गई, बैंक डूब गए और वैश्विक अर्थव्यवस्था कई सालों तक मंदी में रही।भारत की बात करें तो 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्रैश सबसे बड़ा माना जाता है, जब सेंसेक्स करीब 60% तक टूट गया था। इसके अलावा 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी तेज़ गिरावट देखने को मिली थी।
हर्षद मेहता क्रैश शेयर मार्केट में कैसे हुआ था ?
हर्षद मेहता क्रैश 1992 में भारतीय शेयर बाजार में हुआ था। हर्षद मेहता ने बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी बैंक रसीदों (Bank Receipts) के जरिए बैंकों से पैसा निकाला और उस पैसे को शेयर बाजार में लगाया। इस भारी खरीदारी से शेयरों के दाम तेजी से बढ़ गए और बाजार एक तरह से आर्टिफिशियल बुल रन में चला गया। जब घोटाले का खुलासा हुआ, तो बैंकों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया और हर्षद मेहता को शेयर बेचने पड़े। अचानक भारी बिकवाली से बाजार क्रैश हो गया। सेंसेक्स कुछ ही समय में करीब 50% तक गिर गया और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
शेयर मार्केट में फर्जी स्टॉकों से कैसे बचे ?
शेयर मार्केट में फर्जी या धोखाधड़ी वाले स्टॉकों से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले कंपनी के फंडामेंटल्स जैसे मुनाफा, कर्ज, कैश फ्लो और बिज़नेस मॉडल को अच्छी तरह जांचें। बहुत कम समय में असामान्य रिटर्न देने वाले शेयरों से सावधान रहें। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप टिप्स और अनजान यूट्यूब चैनलों की सलाह पर निवेश न करें। कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग, ऑडिटर रिपोर्ट और प्रमोटर होल्डिंग जरूर देखें। कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और अचानक भाव बढ़ने वाले शेयर जोखिम भरे होते हैं। हमेशा SEBI-रजिस्टर्ड सलाहकार से सलाह लें और लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करें।
नोट :– हम किसी प्रकार की निवेश या खरीद, बिकवाल की सलाह नहीं देते हमारा उद्देश्य सिर्फ सरल भाषा में संक्षेप करना है | हम किसी कंपनी को अच्छा या बुरा नहीं बता सिर्फ सरल शब्दों में विवरण देते है|
