भारतीय रूपया की रिकॉर्ड तोड़ गिरावट | क्यों कमजोर हो रहा भारतीय रूपया?

भारतीय रूपया की रिकॉर्ड तोड़ गिरावट
भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास का सबसे बड़ा गिरावट वाला दिन लेकर आया. रुपया पहली बार 90/- के पार फिसला और बाजार खुलते हे रिकॉर्ड तोड़ गिरावट दर्ज की गई , यह 89.87 प्रति डॉलर के मुकाबले 89.97 पर खुला, लेकिन कुछ ही देर में गिरकर ₹90.14/$ के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया | आरबीआई के हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के बावजूद रुपया का यह हाल हुआ। रुपये की कीमत में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट आई है। इससे बाजार में भी चिंता है। बाजार पर इसका क्या असर होगा?
आखिर क्यों कमजोर हो रहा भारतीय रूपया कारण जाने
भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है क्योंकि इस समय कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं — पहला, विदेशी निवेशकों (FPI/F DI) का बहिर्वाह, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है। दूसरा, आयात (विशेषकर कच्चा तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि) निर्यात से कहीं अधिक है, जिससे ट्रेड घाटा (trade deficit) बढ़ता है और डॉलर की माँग बनती है। तीसरा, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है — अमेरिकी ब्याज दरों की ऊँची दरों व सुरक्षित निवेश (safe-haven) के चलते निवेश डॉलर-आधारित बाजारों की ओर जा रहे हैं। चौथा, घरेलू महंगाई, निवेश की कमी और आर्थिक अस्थिरता से रुपया पकड़ खो रहा है। इन सबका मिलाजुला असर है कि रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट का शिकार हो रहा है।
रुपया गिरने के कारण डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संभावित टैरिफ बढ़ाने की घोषणा से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ता है। उच्च टैरिफ से अमेरिका में निर्यात महंगा हो सकता है, जिससे भारतीय व्यापार घाटा बढ़ने का डर रहता है और विदेशी निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं। इस पूंजी बहिर्गमन से रुपये पर दबाव आता है। साथ ही डॉलर के मुकाबले मांग बढ़ने से रुपया कमजोर होता है। अमेरिकी आर्थिक नीतियों में किसी भी कड़े कदम से उभरते बाजारों की करेंसी पर असर दिखता है और रुपया इसका अपवाद नहीं है, इसलिए ऐसे टैरिफ कदम रुपये में गिरावट की आशंका बढ़ा देते हैं।
नोट :- हम किसी भी कंटेंट का झूठ या सच होने की दावा नहीं करते , हम बाजार मैं चल रही बातों का सिर्फ सरल शब्दों में संक्षेप करते हैं|
